मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज के विकास को नई गति मिली है और राज्य सरकार आदिवासी समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक उत्थान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों का संरक्षण करते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।

यह बातें मुख्यमंत्री ने रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास के जनदर्शन हॉल में आयोजित भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए कहीं। इस दौरान उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों और सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि नया राज्य बोर्ड आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा और उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भारतीय आदिम जाति सेवक संघ की गौरवशाली विरासत
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ देश की एक ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित संस्था है, जिसने वर्षों से आदिवासी समाज के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किया है। उन्होंने बताया कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इस संस्था के पहले अध्यक्ष रहे थे, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने भी इस संगठन का नेतृत्व किया था। इससे संस्था की ऐतिहासिक भूमिका और विश्वसनीयता का पता चलता है।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारियों का छत्तीसगढ़ में स्वागत करते हुए कहा कि यह संस्था आदिवासी समाज के हितों की रक्षा और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देती रही है।
जनजातीय बहुल राज्य है छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख जनजातीय बहुल राज्यों में शामिल है, जहां अनेक अनुसूचित जनजातियां और विशेष पिछड़ी जनजातियां अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और विशिष्ट जीवन शैली के साथ निवास करती हैं। ऐसे राज्य में भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के राज्य बोर्ड का गठन जनजातीय विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकास की योजनाएं जनजातीय समाज की परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए उनके जीवन स्तर में सुधार लाएं।
बस्तर में विकास की नई तस्वीर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में बस्तर क्षेत्र विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बस्तर में—
- सड़क संपर्क का तेजी से विस्तार हुआ है।
- स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं।
- शिक्षा सुविधाओं में सुधार हुआ है।
- पेयजल और बिजली की पहुंच बढ़ी है।
- दूरस्थ क्षेत्रों तक संचार सुविधाएं पहुंचाई गई हैं।
- सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से बस्तर के लोगों का जीवन स्तर लगातार बेहतर हो रहा है।
पर्यटन से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं और हस्तशिल्प के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है।
उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में पर्यटक बस्तर पहुंच रहे हैं और स्थानीय होमस्टे में ठहर रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
400 गांवों का पहली बार हुआ सर्वे
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले लगभग चार दशकों में बस्तर के कई दूरस्थ गांव विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। लगभग 400 गांव ऐसे थे जिनका विधिवत सर्वेक्षण तक नहीं हुआ था।
उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने इन गांवों का सर्वे कराकर वहां विकास कार्यों की शुरुआत की है, जिससे अब इन क्षेत्रों में योजनाओं का लाभ पहुंचाना आसान हो गया है।
नियद नेल्लानार योजना से गांवों तक पहुंचीं मूलभूत सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत 500 से अधिक गांवों तक विकास कार्य पहुंचाए गए हैं।
इस योजना के तहत—
- गांवों तक सड़क बनाई गई।
- स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया गया।
- राशन कार्ड बनाए गए।
- नई उचित मूल्य (राशन) दुकानों की शुरुआत हुई।
- विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया गया।
उन्होंने कहा कि जिन गांवों में पहले सरकारी सेवाएं नहीं पहुंच पाती थीं, वहां अब प्रशासन नियमित रूप से कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना संचालित की जा रही है।
इस योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर इलाज मिल सके और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान हो सके।
बस्तर मुन्ने कार्यक्रम से पहुंच रही सरकारी योजनाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने बस्तर मुन्ने कार्यक्रम भी शुरू किया है, जिसका अर्थ है “अग्रणी बस्तर”।
इस पहल का उद्देश्य सुदूर वनांचलों में रहने वाले लोगों तक शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। इसके माध्यम से प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सीधा संवाद भी बढ़ा है।
संस्कृति और विकास साथ-साथ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पहचान है और इसका संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
कार्यक्रम में रहे उपस्थित
कार्यक्रम में भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के अध्यक्ष प्रकाश कुमार उइके, कौशल्या साय, राजेश मालवीय, कुंवर जितेंद्र नरसिंह राणा सहित संघ के पदाधिकारी एवं विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि नया राज्य बोर्ड जनजातीय समाज के विकास, अधिकारों की रक्षा और सामाजिक उत्थान के लिए प्रभावी भूमिका निभाएगा।
