भिलाई। देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) लागत कम करने और मैनपॉवर में कटौती की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) सहित सेल की विभिन्न इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव की योजना पर काम किया जा रहा है। प्रस्ताव के तहत वर्तमान में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों की संख्या धीरे-धीरे कम कर उनकी जगह सेना के पूर्व जवानों (Ex-Army Men) को तैनात करने पर विचार किया जा रहा है।

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह बीएसपी की सुरक्षा व्यवस्था में पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा बदलाव होगा।
क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?
सेल प्रबंधन पर इस्पात मंत्रालय की ओर से लगातार मैनपॉवर और उत्पादन लागत (Production Cost) कम करने का दबाव है। कंपनी का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में बड़ी संख्या में CISF जवानों की तैनाती पर वेतन, आवास, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य भत्तों पर भारी खर्च हो रहा है।
भिलाई इस्पात संयंत्र में वर्तमान में करीब 1,200 CISF जवान तैनात हैं। प्रबंधन का आकलन है कि यदि इनकी जगह प्रशिक्षित पूर्व सैनिकों को नियुक्त किया जाए, तो सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए खर्च में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
पहले कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों की संख्या घटाई गई
लागत कम करने की रणनीति के तहत सेल पहले ही कई कदम उठा चुका है।
- 20 मई से 20 जुलाई तक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) लागू की गई।
- नियमित कर्मचारियों की संख्या घटाने का प्रयास किया गया।
- सभी विभागों को हर वर्ष 20 प्रतिशत तक ठेका श्रमिकों की संख्या कम करने के निर्देश दिए गए।
- अब सुरक्षा व्यवस्था में भी खर्च कम करने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार वीआरएस के माध्यम से जितने कर्मचारी कम होने की उम्मीद थी, उतनी संख्या में कर्मचारियों ने योजना का लाभ नहीं लिया।
एक्स-आर्मी मैन पर क्यों भरोसा?
सेल प्रबंधन की आंतरिक समीक्षा में यह बात सामने आई है कि संयंत्र के सभी हिस्सों में इतनी बड़ी संख्या में CISF जवानों की तैनाती आवश्यक नहीं है। प्रबंधन का मानना है कि पूर्व सैनिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण देकर वही जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
बताया जा रहा है कि संयंत्र के कुछ विभागों में पहले से ही पूर्व सैनिक विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, जिससे इस मॉडल को और व्यापक स्तर पर लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
बड़ी चोरी की घटनाओं ने खड़े किए सवाल
हाल के वर्षों में भिलाई इस्पात संयंत्र में सामने आए लोहे और स्क्रैप चोरी के मामलों ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी के अनुसार, ब्लू डस्ट की आड़ में कई ट्रकों के जरिए बड़ी मात्रा में लोहे का स्क्रैप बाहर ले जाया गया, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसका समय रहते पता नहीं लगा सकीं।
सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब हाल ही में गिरफ्तार एक ट्रक चालक ने पुलिस पूछताछ में दावा किया कि उसने अकेले करीब 50 ट्रक लोहा संयंत्र से बाहर निकाला। इस खुलासे के बाद सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद सेंध
भिलाई इस्पात संयंत्र में सुरक्षा के लिए—
- सैकड़ों CCTV कैमरे,
- ट्रैकिंग सिस्टम,
- कई सुरक्षा जांच चौकियां,
- और बड़ी संख्या में CISF जवान तैनात हैं।
इसके बावजूद यदि बड़े पैमाने पर चोरी की घटनाएं होती रहीं, तो इससे सुरक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यही कारण है कि प्रबंधन अब सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर वैकल्पिक मॉडल पर विचार कर रहा है।
अभी अंतिम फैसला नहीं
फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि सेल प्रबंधन विभिन्न इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था, लागत और संचालन संबंधी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है। समीक्षा पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि CISF जवानों की संख्या किस स्तर तक कम की जाएगी और पूर्व सैनिकों की नियुक्ति किस चरण में की जाएगी।
यदि यह योजना लागू होती है, तो इसका असर न केवल भिलाई इस्पात संयंत्र बल्कि सेल की अन्य इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
