रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। लगभग एक घंटे के अपने संबोधन में उन्होंने सरकार के ढाई साल के कार्यकाल को हर मोर्चे पर विफल बताते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश की सरकार किसी ‘अदृश्य शक्ति’ के इशारे पर चल रही है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव में सरकार की कार्यप्रणाली से जुड़े 136 बिंदुओं को शामिल किया गया है और यह प्रस्ताव प्रदेश की जनता की समस्याओं को सामने लाने के उद्देश्य से लाया गया है।
भाषण की शुरुआत में संघ और मुसोलिनी का किया उल्लेख
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए भूपेश बघेल ने भाजपा विधायक अजय चंद्राकर की पूर्व टिप्पणी का उल्लेख किया और बिना किसी का नाम लिए कांग्रेस नेतृत्व पर लगाए गए आरोपों का जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी भारत आकर यहीं की होकर रह गईं, जिस पर कांग्रेस को गर्व है। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वैचारिक पृष्ठभूमि पर टिप्पणी करते हुए कहा कि गोलमेज सम्मेलन में गए डॉ. बी.एस. मुंजे इटली भी गए थे और वहां से मुसोलिनी की कार्यशैली से प्रभावित होकर लौटे थे।
इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मुंजे का आरएसएस से क्या संबंध था और कांग्रेस बार-बार इटली का मुद्दा क्यों उठाती है।
इस पर भूपेश बघेल ने जवाब दिया कि जब सुविधानुसार लोगों को अपना बताया जाता है और बाद में उनसे दूरी बना ली जाती है, तो यही आरएसएस की कार्यशैली है।
“सरकार किसी अदृश्य शक्ति के इशारे पर चल रही है”
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार बनने से पहले ही प्रदेश की सत्ता संचालन की दिशा तय हो चुकी थी।
उन्होंने कहा,
“ऐसा लगता है कि सरकार किसी अदृश्य शक्ति के इशारे पर चल रही है। आखिर प्रदेश की सरकार किसके निर्देशों पर काम कर रही है?”
इस दौरान भाजपा विधायक सुनील सोनी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का उल्लेख करते हुए टिप्पणी की कि उनके समय सरकार कौन चलाता था।
जवाब में भूपेश बघेल ने कहा कि मनमोहन सिंह जब बोलते थे तो पूरी दुनिया उनकी बात सुनती थी।
सरकार के जवाब को बताया “घिसा-पिटा”
भूपेश बघेल ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष की ओर से दिया गया जवाब पूरी तरह दोहराव वाला था।
उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं ने फिर वही गौठान, धान खरीदी और पुरानी बातें दोहराईं, जबकि जनता वर्तमान सरकार के कामों का जवाब चाहती है।
धान खरीदी और किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल रही है।
उन्होंने कहा कि—
- किसानों की जमीन का रकबा कम किया जा रहा है।
- किसान पटवारी और तहसीलदार के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
- खरीदा गया धान महीनों तक संग्रहण केंद्रों में पड़ा रहा।
- बारिश के कारण बड़ी मात्रा में धान भीगा और खराब हुआ।
- सरकार समय पर धान का उठाव नहीं करा सकी।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने धान जमा करने की समय-सीमा नहीं बढ़ाई होती तो स्थिति और गंभीर होती।
खाद संकट का लगाया आरोप
भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश के किसानों को समय पर डीएपी खाद उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कृत्रिम रूप से खाद की कमी पैदा कर किसानों को खुले बाजार से महंगे दाम पर खाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
उनका दावा था कि किसान प्रति बोरी लगभग 700 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करने को मजबूर हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि किसान यूरिया और पोटाश के बजाय एनपीके खाद लेने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने किया पलटवार
इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है और कांग्रेस किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।
इसके जवाब में भूपेश बघेल ने खाद के उपयोग के अनुपात पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार किसानों की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय कोरोना जैसी कठिन परिस्थितियों में भी किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी गई थी।
किसानों को प्रोत्साहन राशि पर उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार किसानों को दूसरी फसल लेने के लिए प्रोत्साहन देने की बात करती है, लेकिन यह नहीं बताती कि कितने किसानों को वास्तव में इसका लाभ मिला।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की थी।
राशन और महतारी वंदन योजना पर भी उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना सहित कई योजनाओं का लाभ लेने के लिए इंटरनेट और डिजिटल प्रक्रिया अनिवार्य बना दी गई है, जिससे दूरदराज के लोगों को परेशानी हो रही है।
उन्होंने दावा किया कि—
- केवाईसी नहीं होने के कारण लगभग 30 लाख लोगों को राशन नहीं मिल सका।
- लोगों को कई किलोमीटर दूर जाकर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ रही है।
उन्होंने कांग्रेस सरकार के समय कोरोना काल में तीन महीने का राशन एक साथ घर-घर पहुंचाने का भी उल्लेख किया।
सरकार की आर्थिक स्थिति पर उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार इस बार अनुपूरक बजट (सप्लीमेंट्री बजट) नहीं लाई।
उन्होंने दावा किया कि इसके दो संभावित कारण हो सकते हैं—
- सरकार के पास पर्याप्त धन नहीं है।
- केंद्र से अपेक्षित राशि नहीं मिल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से विधवा पेंशन सहित कई योजनाओं के भुगतान प्रभावित हो रहे हैं और स्थानीय निकायों में कर्मचारियों के वेतन भुगतान में भी कठिनाई आ रही है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दिया जवाब
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सरकार पहले से बेहतर वित्तीय प्रबंधन कर रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र से नियमित राशि मिल रही है और आवश्यकता पड़ने पर ही अनुपूरक बजट लाया जाता है।
कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है।
उन्होंने सीतापुर, बलौदाबाजार और अन्य घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मामलों में निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है।
उन्होंने बलौदाबाजार हिंसा और हाल की आपराधिक घटनाओं की सीबीआई जांच की मांग दोहराई।
नकली खाद और महादेव एप का मुद्दा भी उठाया
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बोड़ला क्षेत्र में नकली खाद की शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने महादेव एप मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भाजपा से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई की है।
आदिवासी और वन क्षेत्रों के मुद्दे उठाए
भूपेश बघेल ने कहा कि पेसा कानून को लागू करने का श्रेय कांग्रेस सरकार को जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि तमनार और हसदेव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई हो रही है और आदिवासी समुदाय की चिंताओं की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद कम होने का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इसका श्रेय केवल वर्तमान सरकार को नहीं दिया जा सकता।
उनके अनुसार नक्सलवाद के खिलाफ सभी पूर्ववर्ती सरकारों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
- मेकाहारा जैसे बड़े अस्पतालों की स्थिति खराब है।
- ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से दवाइयों की खरीद की जा रही है।
“सरकार को सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं”
अपने भाषण के अंत में भूपेश बघेल ने कहा कि विपक्ष द्वारा प्रस्तुत आरोपपत्र सरकार के जनविरोधी निर्णयों का प्रमाण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों, गरीबों, आदिवासियों और आम नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सरकार को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है और अविश्वास प्रस्ताव इन्हीं मुद्दों को लेकर सदन में लाया गया है।
