छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी पहल और सुशासन तिहार के तहत दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का एक प्रेरणादायक उदाहरण खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर बैगा जनजाति की महिलाओं सहित छह ग्रामीणों का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन कराया गया, जिससे उन्हें फिर से स्पष्ट रूप से देखने की उम्मीद मिली है।
मुख्यमंत्री चौपाल में उठाई गई थी समस्या
4 मई 2026 को सुशासन तिहार के अंतर्गत विकासखंड छुईखदान के दूरस्थ वनांचल एवं विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति बहुल ग्राम सरौधी में मुख्यमंत्री चौपाल का आयोजन किया गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय स्वयं ग्रामीणों की समस्याएं सुन रहे थे।

चौपाल में ग्राम कुम्ही की हरेलिया बाई गोंड और ग्राम सरौधी की मनमत बाई बैगा ने आंखों में मोतियाबिंद की गंभीर समस्या बताते हुए उपचार की मांग की। दोनों महिलाओं ने बताया कि कमजोर दृष्टि के कारण उन्हें दैनिक कार्यों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने दिखाई तत्परता
मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही जिला कलेक्टर श्री इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा तथा खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष बघेल के नेतृत्व में प्रभावित क्षेत्र में विशेष स्वास्थ्य अभियान शुरू किया गया।
नेत्र सहायक अधिकारी नरेंद्र निषाद ने बैगा जनजातीय क्षेत्र में नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित कर ग्रामीणों की आंखों की जांच की। जांच के दौरान हरेलिया बाई और मनमत बाई सहित कुल छह मरीजों में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई।
आदि आरोग्य रथ बना ग्रामीणों का सहारा
मरीजों को इलाज के लिए आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने आदि आरोग्य रथ की व्यवस्था की। इस विशेष स्वास्थ्य वाहन के माध्यम से सभी मरीजों को निःशुल्क रूप से मेडिकल कॉलेज अस्पताल राजनांदगांव पहुंचाया गया।
यह पहल विशेष रूप से उन वनांचल क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में हुआ सफल ऑपरेशन
मेडिकल कॉलेज अस्पताल राजनांदगांव में विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों की टीम ने सभी मरीजों का सफलतापूर्वक मोतियाबिंद ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान मरीजों की आंखों में लेंस प्रत्यारोपण (Lens Implantation) भी किया गया, जिससे उनकी दृष्टि में सुधार संभव हो सके।
उपचार पूर्ण होने के बाद सभी मरीजों को सुरक्षित तरीके से उनके गांव वापस पहुंचाया गया।
ऑपरेशन के बाद भी जारी है निगरानी
स्वास्थ्य विभाग केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मरीजों की नियमित निगरानी भी की जा रही है। वरिष्ठ नेत्र सहायक अधिकारी विनय रामटेके ने ऑपरेशन के बाद मरीजों का फॉलोअप किया और उन्हें दवाइयों का नियमित सेवन, आंखों की स्वच्छता बनाए रखने तथा धूल और धुएं से बचाव संबंधी आवश्यक सलाह दी।
बैगा क्षेत्रों तक पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं
स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि राज्य सरकार का उद्देश्य दूरस्थ वनांचल और विशेष पिछड़ी जनजातियों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। आदि आरोग्य रथ जैसी योजनाएं उन लोगों के लिए जीवनरेखा साबित हो रही हैं, जो भौगोलिक कठिनाइयों के कारण समय पर उपचार नहीं प्राप्त कर पाते।
ग्रामीणों से स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से आग्रह किया है कि आंखों की रोशनी कम होना, धुंधला दिखाई देना या अन्य किसी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण दिखने पर तुरंत निकटतम उप स्वास्थ्य केंद्र, मितानिन या स्वास्थ्य कर्मियों को सूचना दें। समय पर जांच और उपचार से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
यह पहल न केवल बैगा महिलाओं को नई रोशनी देने का काम कर रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि शासन की योजनाएं जब संवेदनशीलता और तत्परता के साथ लागू होती हैं, तो दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव संभव है।
