धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का प्रसिद्ध गंगरेल जलाशय रविवार को उद्यमिता, नवाचार और स्टार्टअप गतिविधियों का केंद्र बन गया। गंगरेल की खूबसूरत वादियों के बीच आयोजित फाउंडर्स मानसून रिट्रीट-2026 में 200 से अधिक स्टार्टअप फाउंडर्स, उद्यमी, मेंटर्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
एक दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य स्टार्टअप फाउंडर्स को एक साझा मंच उपलब्ध कराना, नए बिजनेस आइडिया पर चर्चा करना, अनुभव साझा करना और निवेश व बाजार विस्तार की संभावनाओं पर मंथन करना रहा। कार्यक्रम की थीम “एस्केप. एंगेज. एलीवेट.” रखी गई थी।

इस दौरान प्रतिभागियों ने अपने बिजनेस आइडिया पेश किए और विशेषज्ञों तथा अनुभवी उद्यमियों से उन्हें बेहतर बनाने के लिए सुझाव लिए। कार्यक्रम में स्टार्टअप इंडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, छत्तीसगढ़ स्टार्टअप नीति 2025-30, निवेश, मार्केटिंग और बिजनेस विस्तार जैसे विषय प्रमुख रहे।
गंगरेल में दिखा स्टार्टअप और नवाचार का संगम
फाउंडर्स मानसून रिट्रीट का आयोजन सामान्य कारोबारी सम्मेलन से अलग अंदाज में किया गया। प्राकृतिक वातावरण के बीच स्टार्टअप फाउंडर्स को एक-दूसरे से बातचीत और नेटवर्किंग का अवसर मिला। विभिन्न क्षेत्रों से आए उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं पर चर्चा की।
कार्यक्रम में शुरुआती चरण के स्टार्टअप से लेकर स्थापित उद्यमियों तक ने हिस्सा लिया। नए फाउंडर्स के लिए यह आयोजन अपने बिजनेस आइडिया को अनुभवी लोगों के सामने रखने और संभावित सहयोगियों से जुड़ने का अवसर बना।
स्थानीय संसाधनों और युवाओं की प्रतिभा को उद्यमिता से जोड़ने पर जोर
धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में स्थानीय संसाधनों और युवाओं की प्रतिभा को उद्यमिता से जोड़कर रोजगार तथा नए व्यवसाय के अवसर तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि धमतरी में कृषि एवं कृषि प्रसंस्करण, पर्यटन, जल आधारित गतिविधियों, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पाद, डिजिटल तकनीक और सेवा क्षेत्र में स्टार्टअप की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
कलेक्टर ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर युवाओं को रोजगार तलाशने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
स्टार्टअप इंडिया के तहत नीतिगत सहयोग की जानकारी
कार्यक्रम में डीपीआईआईटी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव संजीव सिंह ने भी स्टार्टअप फाउंडर्स के साथ संवाद किया।
उन्होंने स्टार्टअप इंडिया के तहत उपलब्ध नीतिगत सहयोग, सरकारी सुविधाओं और वित्त पोषण के अवसरों की जानकारी दी। फाउंडर्स ने भी स्टार्टअप शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के दौरान आने वाली चुनौतियों तथा सरकारी सहायता से जुड़े सवालों पर चर्चा की।
इस संवाद का उद्देश्य नए उद्यमियों को सरकारी योजनाओं और नीतिगत प्रावधानों की बेहतर जानकारी देना रहा, ताकि वे अपने बिजनेस को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने के साथ उपलब्ध वित्तीय और संस्थागत सहयोग का लाभ उठा सकें।
AI से लेकर छत्तीसगढ़ स्टार्टअप नीति तक पर विशेषज्ञ सत्र
कार्यक्रम में अलग-अलग विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। खास तौर पर शुरुआती चरण के स्टार्टअप में AI का उपयोग, छत्तीसगढ़ स्टार्टअप नीति 2025-30, कृषि और बस्तर आधारित स्टार्टअप, उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने की रणनीति, सोशल मीडिया ब्रांडिंग और कानूनी अनुपालन जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने फाउंडर्स को बताया कि केवल अच्छा प्रोडक्ट या आइडिया होना पर्याप्त नहीं है। उसे सही बाजार तक पहुंचाना, ग्राहक की जरूरत समझना, डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी इस्तेमाल करना और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना भी बिजनेस की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
अनुभवी उद्यमियों ने साझा की अपनी बिजनेस जर्नी
कार्यक्रम में अनुभवी उद्यमियों ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप शुरू करने के शुरुआती दौर में किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और असफलताओं से सीख लेकर बिजनेस को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
फाउंडर्स को निवेश जुटाने, टीम तैयार करने, ग्राहक बनाने, प्रोडक्ट में सुधार करने और बाजार में अपनी पहचान बनाने से जुड़े व्यावहारिक अनुभव भी सुनने को मिले।
नेटवर्किंग पर भी रहा खास फोकस
फाउंडर्स मानसून रिट्रीट में केवल भाषण और विशेषज्ञ सत्र ही नहीं हुए, बल्कि प्रतिभागियों के बीच नेटवर्किंग को भी विशेष महत्व दिया गया।
संस्थापक परिचय चक्र, इनडोर चैलेंज और विभिन्न फाउंडर-केंद्रित गतिविधियों के जरिए प्रतिभागियों को एक-दूसरे से परिचित होने और अपने विचार साझा करने का अवसर मिला। अलग-अलग क्षेत्रों से आए उद्यमियों के बीच नए संपर्क बने, जिनसे भविष्य में बिजनेस सहयोग और साझेदारी की संभावनाएं बन सकती हैं।
कृषि, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों में स्टार्टअप की संभावनाएं
धमतरी जैसे जिले में स्टार्टअप के लिए स्थानीय संसाधनों को आधार बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण यहां एग्रीटेक, कृषि प्रसंस्करण और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में नए बिजनेस मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।
इसी तरह गंगरेल जलाशय और आसपास के प्राकृतिक एवं पर्यटन स्थलों को देखते हुए पर्यटन और जल आधारित गतिविधियों में भी उद्यमिता की संभावनाएं हैं। स्थानीय उत्पादों को ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग के जरिए बड़े बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
रोजगार और नए व्यवसाय के अवसर पैदा करने की दिशा में पहल
फाउंडर्स मानसून रिट्रीट-2026 को धमतरी में स्टार्टअप और उद्यमिता के माहौल को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आयोजन के जरिए स्थानीय युवाओं, उद्यमियों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच संपर्क बढ़ाने का प्रयास किया गया।
स्थानीय संसाधनों को आधुनिक तकनीक और नए बिजनेस मॉडल से जोड़कर रोजगार के अवसर पैदा करने, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और युवाओं को उद्यमिता की ओर आकर्षित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
गंगरेल की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच आयोजित इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि स्टार्टअप और नवाचार केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं हैं। छोटे शहरों और जिलों में भी स्थानीय जरूरतों और संसाधनों पर आधारित नए बिजनेस आइडिया विकसित किए जा सकते हैं।
