भिलाईनगर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी के पैसों को बैंक खातों के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर करने वाले नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने छह थाना क्षेत्रों में अभियान चलाकर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग महज 5 हजार से 15 हजार रुपये तक के कमीशन के लालच में अपने या दूसरे लोगों के बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।

पुलिस जांच में कई बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त किए हैं। संबंधित थानों में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(2), 318(3) और 317(4) के तहत अपराध दर्ज कर कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
छह थाना क्षेत्रों में एक साथ पुलिस की कार्रवाई
ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चन्द्रा के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहे बैंक खातों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत बुधवार को जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में संयुक्त कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई में नेवई, पुरानी भिलाई, भिलाई नगर, सुपेला और खुर्सीपार थाना पुलिस के साथ एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (एसीसीयू) की टीम शामिल रही। पुलिस ने संदिग्ध बैंक खातों और उनमें हुए लेन-देन की जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की जांच का प्रमुख आधार बैंक खातों में हुई संदिग्ध गतिविधियां और उनसे जुड़े तकनीकी साक्ष्य रहे। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि किन खातों में रकम जमा हुई, पैसा किन खातों में आगे भेजा गया और इन लेन-देन के पीछे कौन लोग शामिल थे।
कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को देते थे बैंक खाते
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों पर आरोप है कि वे थोड़ी रकम कमाने के लालच में अपने बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों को करने देते थे। कुछ मामलों में दूसरे लोगों के बैंक खातों को भी इस नेटवर्क के लिए उपलब्ध कराने की बात सामने आई है।
आरोपी बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड जैसे जरूरी साधन दूसरे व्यक्तियों को सौंप देते थे। इसके बदले उन्हें 5 हजार से 15 हजार रुपये तक कमीशन मिलने का लालच दिया जाता था। इस तरह आरोपी बिना किसी वैध कारोबारी गतिविधि के अपने बैंक खातों को दूसरे लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करा रहे थे।
ऐसे मामलों में बैंक खाते का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति जरूरी नहीं कि सीधे ठगी करने वाले व्यक्ति के संपर्क में दिखाई दे। ठगी की रकम खाते में आने के बाद उसे दूसरे खातों में भेज दिया जाता है या अन्य माध्यमों से निकालने की कोशिश की जाती है। इससे रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
क्या होते हैं म्यूल बैंक अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त रकम को प्राप्त करने, आगे ट्रांसफर करने या उसकी पहचान छिपाने के लिए किया जाता है। कई बार खाताधारक जानबूझकर कमीशन के बदले अपना खाता उपलब्ध कराता है, जबकि कुछ मामलों में लोगों को खाते के वास्तविक इस्तेमाल की पूरी जानकारी नहीं होती।
साइबर ठगी करने वाले लोग ऐसे खातों के जरिए पैसों को कई स्तरों पर ट्रांसफर करने की कोशिश करते हैं। उदाहरण के तौर पर, किसी व्यक्ति से ऑनलाइन ठगी करके हासिल की गई रकम पहले एक खाते में जमा की जाती है। इसके बाद रकम दूसरे और फिर अन्य खातों में भेजी जा सकती है। इस प्रक्रिया से ठगी की रकम का रास्ता जटिल हो जाता है और अपराधियों की पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है।
इसी वजह से पुलिस और बैंकिंग एजेंसियां संदिग्ध लेन-देन, खातों के इस्तेमाल के तरीके और खाताधारकों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करती हैं। किसी व्यक्ति का बैंक खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल होना गंभीर मामला हो सकता है, इसलिए खाते और उससे जुड़े बैंकिंग साधनों को किसी अनजान व्यक्ति को सौंपना जोखिम भरा है।
बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान कई बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। पुलिस ने बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की। इसी आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संदिग्ध लेन-देन की कुल राशि, प्रत्येक आरोपी के खाते में आई रकम और साइबर ठगी के पीड़ितों की संख्या का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। इसलिए इन खातों से जुड़े सभी लेन-देन और संभावित पीड़ितों के बारे में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मोबाइल, सिम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेज जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 13 आरोपियों के कब्जे से बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त किए हैं। ये सामग्री जांच में अहम मानी जा रही है, क्योंकि इनके जरिए बैंक खातों के संचालन, संबंधित लोगों के संपर्क और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है।
पुलिस अब जब्त सामग्री और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका की जांच कर रही है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि खातों में आई रकम कहां से आई, उसे किन खातों में भेजा गया और इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
BNS की धाराओं में अपराध दर्ज, न्यायिक रिमांड पर भेजे गए आरोपी
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 318(3) और 317(4) के तहत अपराध दर्ज किया है। कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किए गए आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस की जांच का उद्देश्य संदिग्ध बैंक खातों के इस्तेमाल और साइबर ठगी की रकम के लेन-देन से जुड़े पूरे नेटवर्क की कड़ियों को समझना है। बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
लोगों के लिए जरूरी सावधानी
पुलिस की यह कार्रवाई बैंक खातों को कमीशन के बदले दूसरों को इस्तेमाल के लिए देने के जोखिम को भी उजागर करती है। किसी अनजान व्यक्ति को बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर या सिम कार्ड सौंपना गंभीर कानूनी और वित्तीय परेशानी का कारण बन सकता है।
यदि कोई व्यक्ति आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता खुलवाने, खाते का नियंत्रण लेने या खाते में रकम मंगवाकर आगे भेजने के लिए कहता है, तो सतर्क रहना जरूरी है। खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध में होने पर खाताधारक की भूमिका की भी जांच हो सकती है।
फिलहाल भिलाई में गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है। जांच के आगे बढ़ने के साथ संदिग्ध खातों में हुए लेन-देन और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।
