रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था, किसानों के हित में संचालित योजनाओं, कृषि सुधारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अपनाए गए मॉडल का अध्ययन करने रायपुर पहुंचा था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों, कृषि विकास की रणनीतियों और ग्रामीण समृद्धि के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी साझा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर की समृद्ध आदिवासी कला और संस्कृति के प्रतीक बस्तर आर्ट का स्मृति-चिह्न भेंट किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी पर निर्भर है। इसलिए राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार समन्वित रूप से किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही हैं। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ-साथ कृषि निवेश, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और फसल विविधीकरण को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सके।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी की जा रही है। खरीफ विपणन वर्ष में राज्य सरकार ने लगभग 141 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया, जो देश के सबसे बड़े धान खरीदी अभियानों में शामिल है। किसानों की सुविधा के लिए पूरे प्रदेश में लगभग 2700 धान उपार्जन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से धान की खरीदी की जाती है। इसके साथ ही धान के सुरक्षित भंडारण के लिए संग्रहण केंद्रों और गोदामों का व्यापक नेटवर्क भी विकसित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए किसान पंजीयन, धान तौल, परिवहन और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को तकनीक आधारित, पारदर्शी और सरल बनाया गया है। किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के साथ-साथ विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनकी आर्थिक स्थिति को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की कृषक उन्नति योजना सहित किसानों के हित में संचालित अन्य योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
चर्चा के दौरान महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगे महाराष्ट्र के चार जिलों में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था, किसानों को मिलने वाला समर्थन मूल्य, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीक आधारित प्रबंधन अत्यंत प्रभावी तथा अनुकरणीय है। प्रतिनिधिमंडल ने माना कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए प्रयास अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक हैं।
विधायकों ने कहा कि छत्तीसगढ़ का धान खरीदी मॉडल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का सफल उदाहरण बनकर उभरा है। वे इस मॉडल के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर महाराष्ट्र के धान उत्पादक क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की व्यवस्थाएं विकसित करने का प्रयास करेंगे, जिससे वहां के किसानों को भी अधिक लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्यों के बीच सफल योजनाओं और अनुभवों का आदान-प्रदान देश के कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे अध्ययन भ्रमण से विभिन्न राज्यों को एक-दूसरे की सफल योजनाओं से सीखने और उन्हें अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने का अवसर मिलता है, जिससे किसानों के हित में बेहतर नीतियां विकसित की जा सकती हैं।
इस अवसर पर लक्ष्मी राजवाड़े, डॉ. परिणय फुके, विनोद अग्रवाल, राजू कारेमोरे, संजय पुराम, शशिकांत द्विवेदी, राहुल भगत सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
