पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ अभियान का समापन, विजेता विद्यार्थियों और सामाजिक संस्थाओं का हुआ सम्मान
रायपुर। युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में पिछले एक महीने से चलाए जा रहे ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ संकल्प अभियान का समापन हुआ। समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस दौरान राज्यपाल ने युवाओं से नशे से पूरी तरह दूर रहने और अपनी ऊर्जा, प्रतिभा एवं क्षमता को राष्ट्र निर्माण में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा केवल देश का भविष्य नहीं हैं, बल्कि वर्तमान की भी सबसे महत्वपूर्ण शक्ति हैं। युवाओं की सोच, उनके निर्णय, संकल्प और सपने ही आने वाले समय में देश की दिशा तय करेंगे।
युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत : राज्यपाल
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है। किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा पीढ़ी होती है। यदि युवा स्वस्थ, शिक्षित, अनुशासित और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हैं तो देश तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि युवा वर्ग के सामने आज शिक्षा, रोजगार और करियर के साथ-साथ कई सामाजिक और मानसिक चुनौतियां भी हैं। ऐसे समय में नशे जैसी बुराई युवाओं की क्षमता को कमजोर कर सकती है।
राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें परिवार, शिक्षण संस्थान, समाज, सामाजिक संगठन और स्वयं युवाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को एक सामाजिक आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता है, ताकि युवाओं को नशे से दूर रखते हुए उन्हें शिक्षा, खेल, कौशल विकास, रचनात्मक गतिविधियों और राष्ट्र निर्माण के कार्यों से जोड़ा जा सके।
2 अगस्त से शुरू हुआ महाअभियान
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त 2026 को युवाओं को नशामुक्त बनाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से इस महाअभियान की शुरुआत की है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल लोगों को नशे के नुकसान के बारे में जानकारी देना नहीं है, बल्कि समाज में ऐसी सकारात्मक सोच विकसित करना भी है, जिसमें युवा स्वयं नशे से दूर रहने का संकल्प लें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
राज्यपाल ने कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता को घर-घर और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाना जरूरी है। विश्वविद्यालय और कॉलेज इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि युवा वर्ग का बड़ा हिस्सा इन्हीं संस्थानों से जुड़ा हुआ है।
सूखे नशे का बढ़ता चलन गंभीर चिंता
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि वर्तमान समय में पारंपरिक नशे के साथ-साथ सूखे नशे का चलन भी बढ़ रहा है, जो विशेष रूप से युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है।
उन्होंने कहा कि नशे की शुरुआत कई बार प्रयोग या दोस्तों के दबाव जैसी छोटी परिस्थितियों से होती है, लेकिन धीरे-धीरे व्यक्ति इसकी गिरफ्त में आ सकता है। इससे उसकी पढ़ाई, करियर, पारिवारिक संबंध और सामाजिक जीवन प्रभावित होने लगता है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे को किसी समस्या का समाधान न समझें और यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहा है तो उसे अकेला छोड़ने के बजाय मदद और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास करें।
नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति के प्रति संवेदनशीलता जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को केवल दोषी मानकर उससे दूरी बना लेना उचित नहीं है। ऐसे लोगों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि नशे की लत से बाहर निकालने के लिए काउंसलिंग, मनोवैज्ञानिक सहायता और आवश्यकता पड़ने पर उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि अत्यधिक नशे के कारण व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इससे मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं और व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इसलिए नशा मुक्ति के प्रयासों को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और परामर्श सेवाओं से भी जोड़ना जरूरी है।
परीक्षा और करियर के तनाव से निपटने के लिए नशा समाधान नहीं
राज्यपाल रमेन डेका ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी समय परीक्षा का दबाव, करियर की चिंता, असफलता का डर और परिवार या समाज की अपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों से बचने के लिए नशे का सहारा लेना किसी भी स्थिति में समाधान नहीं है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि समस्या से भागना समाधान नहीं है, बल्कि समस्या का सामना करना ही वास्तविक साहस है।
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि तनाव या असफलता की स्थिति में अपने माता-पिता, शिक्षक, मित्र या विशेषज्ञ से बातचीत करें। अपनी परेशानियों को मन में दबाने के बजाय साझा करने से समाधान का रास्ता निकाला जा सकता है।
अनुशासन और नियमित अध्ययन को बनाएं जीवन का हिस्सा
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अनुशासन, समय की पाबंदी और नियमित अध्ययन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि इससे व्यक्ति की सोच व्यापक होती है और विभिन्न विषयों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
उन्होंने युवाओं को अपनी दिनचर्या में पढ़ाई के साथ खेल, योग, रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक कार्यों को भी शामिल करने की सलाह दी। सकारात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहने से युवाओं को नकारात्मक आदतों से दूर रखने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल एडिक्शन भी बड़ी चुनौती
राज्यपाल ने बदलते समय के साथ युवाओं के सामने उभर रही एक अन्य चुनौती डिजिटल एडिक्शन की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म आज जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इनका सही इस्तेमाल शिक्षा, ज्ञान और संवाद के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है, लेकिन इनका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने युवाओं से डिजिटल माध्यमों का संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग व्यक्ति की प्रगति के लिए होना चाहिए, न कि व्यक्ति तकनीक का गुलाम बन जाए।
त्रिलोचन चावला ने बताए नशा मुक्ति के मनोवैज्ञानिक पहलू
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हार्टफुलनेस आश्रम, हैदराबाद के संचालक त्रिलोचन चावला ने विद्यार्थियों को नशा मुक्ति के मनोवैज्ञानिक पहलुओं के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने युवाओं को समझाया कि नशे की आदत केवल शारीरिक स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार, सोच, भावनाओं और सामाजिक संबंधों पर भी असर डाल सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, आत्मनियंत्रण विकसित करने और मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को नशा मुक्त भारत अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ भी दिलाई।
NSS और ‘माय भारत’ वॉलिंटियर्स की रही महत्वपूर्ण भूमिका
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने के दौरान विश्वविद्यालय में नशे के खिलाफ विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
उन्होंने बताया कि अभियान को सफल बनाने में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और माय भारत वॉलिंटियर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अभियान के तहत विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें सकारात्मक गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया गया।
प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों का सम्मान
अभियान के दौरान आयोजित विभिन्न जागरूकता और रचनात्मक प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। समापन समारोह में इन प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को राज्यपाल रमेन डेका ने सम्मानित किया।
विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए राज्यपाल ने उन्हें भविष्य में भी सामाजिक जागरूकता से जुड़े अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी के बिना किसी भी सामाजिक अभियान को व्यापक सफलता नहीं मिल सकती। इसलिए विद्यार्थी स्वयं जागरूक बनने के साथ अपने परिवार और समाज में भी सकारात्मक संदेश पहुंचाएं।
वरिष्ठ प्रोफेसर राजीव चौधरी भी सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ प्रोफेसर राजीव चौधरी को भी राज्यपाल रमेन डेका ने सम्मानित किया।
शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिले इस सम्मान को विश्वविद्यालय परिवार के लिए भी गौरव का विषय बताया गया। राज्यपाल ने शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में योगदान देने वाले शिक्षकों एवं शिक्षाविदों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
रक्तदान शिविर आयोजित करने वाली संस्थाओं का सम्मान
नशा मुक्ति अभियान के साथ सामाजिक सेवा गतिविधियों को भी जोड़ा गया। रेडक्रॉस और रोटरी संस्था द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर के लिए दोनों संस्थाओं के प्रतिनिधियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
इससे कार्यक्रम का उद्देश्य केवल नशे के खिलाफ जागरूकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं को सामाजिक सेवा और मानव कल्याण से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।
बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहे मौजूद
समापन समारोह में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य, विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य, प्राध्यापकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
पूरे अभियान के दौरान युवाओं को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान के बारे में जागरूक करने के साथ उन्हें स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
युवाओं के लिए राज्यपाल का स्पष्ट संदेश
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल रमेन डेका का संदेश स्पष्ट रहा कि युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को नशे जैसी बुराइयों में बर्बाद करने के बजाय शिक्षा, कौशल, खेल, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में लगाएं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश की युवा शक्ति स्वस्थ, जागरूक, अनुशासित और जिम्मेदार होगी। नशामुक्त युवा केवल अपने परिवार और समाज के लिए ही बेहतर भविष्य तैयार नहीं करते, बल्कि वे देश की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
इसलिए नशा मुक्ति को केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि परिवार, शिक्षण संस्थानों, समाज और युवाओं की साझा जिम्मेदारी बनाना जरूरी है। यही सामूहिक प्रयास भारत की युवा शक्ति को सही दिशा देकर विकसित और सशक्त भारत के निर्माण की नींव मजबूत कर सकता है।
