डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में प्रस्तावित 55 करोड़ रुपये की परिक्रमा पथ परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को कांग्रेस ने प्रभावित किसानों के साथ मिलकर परियोजना के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाईस्कूल चौक पर चक्काजाम कर दिया, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। कई घंटों तक मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं और प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए तत्काल वैकल्पिक मार्ग (रूट डायवर्ट) लागू करना पड़ा।

हाईस्कूल चौक पर सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी
कांग्रेस कार्यकर्ताओं और किसानों ने डोंगरगढ़ के हाईस्कूल चौक पर सड़क पर बैठकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण खैरागढ़, चिचोला, महाराष्ट्र और राजनांदगांव की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। इसके बाद वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकालकर यातायात सुचारू करने का प्रयास किया गया।
प्रदर्शन में शामिल हुए विधायक और कांग्रेस नेता
आंदोलन में विधायक हर्षिता स्वामी बघेल, कांग्रेस नेता नवाज खान, विजयराज सिंह, संध्या देशपांडे सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और परिक्रमा पथ परियोजना का विरोध कर रहे प्रभावित किसान शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि परियोजना से कई किसानों की जमीन प्रभावित होगी और उनकी आजीविका पर असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से परियोजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
कांग्रेस ने उठाई ये चार प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि डोंगरगढ़ शहर की सबसे बड़ी जरूरत परिक्रमा पथ नहीं, बल्कि बाईपास और बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था है। उनका आरोप है कि सरकार मूल समस्याओं को नजरअंदाज कर करोड़ों रुपये की परियोजना पर जोर दे रही है।
कांग्रेस ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं—
- 55 करोड़ रुपये की परिक्रमा पथ परियोजना को तत्काल रद्द किया जाए।
- डोंगरगढ़ के लिए बाईपास सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया जाए।
- सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए।
- शहर के तीन प्रमुख चौकों पर स्थायी ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए।
जाम से यात्रियों को हुई परेशानी
चक्काजाम के कारण सैकड़ों वाहन लंबे समय तक जाम में फंसे रहे। यात्रियों, व्यापारियों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई यात्री घंटों तक सड़क पर फंसे रहे, जबकि प्रशासन ने यातायात को सामान्य करने के लिए लगातार वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कराया।
आंदोलन ने पकड़ा राजनीतिक स्वरूप
परिक्रमा पथ परियोजना को लेकर शुरू हुआ विरोध अब किसानों की आपत्तियों से आगे बढ़कर बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। कांग्रेस इसे जनहित और किसानों के अधिकारों का मुद्दा बता रही है, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात सुचारू रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।
फिलहाल परियोजना को लेकर विवाद जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
