CG News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर दौरे के बीच बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक आयोजन मुरिया दरबार को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम ने मुरिया दरबार में आम लोगों की भागीदारी और उनकी समस्याओं को सुने जाने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पहले मुरिया दरबार में प्रशासनिक दबाव अपेक्षाकृत कम रहता था, जिससे लोग आसानी से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते थे। लेकिन अब प्रशासनिक दबाव के कारण हर व्यक्ति अपनी बात नहीं रख पाता। उन्होंने जोर दिया कि मुरिया दरबार में सभी लोगों की समस्याएं सुनी जानी चाहिए।

सांसद फूलो देवी नेताम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर आगमन का स्वागत करते हुए कहा कि क्षेत्र के आदिवासी समाज को राष्ट्रपति से काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने आशा जताई कि राष्ट्रपति जनजातीय समुदाय की मांगों पर ध्यान देंगी और उनके समाधान की दिशा में पहल करेंगी। इसके साथ ही उन्होंने बस्तर में बाढ़ से हुए नुकसान, मच्छरदानी टेंडर और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी अपनी बात रखी।

मुरिया दरबार में आम लोगों की भागीदारी पर सांसद ने उठाए सवाल
राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम ने मुरिया दरबार की पारंपरिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए अपनी समस्याएं और मांगें सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच रहा है। उनके अनुसार, पहले लोग अपेक्षाकृत कम प्रशासनिक दबाव के बीच अपनी बात रखने के लिए दरबार तक पहुंच पाते थे।
उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान व्यवस्था में प्रशासनिक दबाव के चलते हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का समान अवसर नहीं मिल पा रहा है। सांसद ने कहा कि मुरिया दरबार में आने वाले सभी लोगों की समस्याएं सुनी जानी चाहिए, ताकि उनकी वास्तविक जरूरतें और परेशानियां सामने आ सकें।
मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा का अहम हिस्सा है। राजशाही के दौर में इस दरबार में गांवों के मांझी-चालकी अपने क्षेत्रों की समस्याएं राजा के सामने रखते थे। समय के साथ शासन व्यवस्था में बदलाव आया, लेकिन इस आयोजन का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व बना रहा।
ऐसे में सांसद का कहना है कि इस परंपरा की मूल भावना को बनाए रखना जरूरी है, ताकि आम लोगों और जनजातीय समुदायों को अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिल सके।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आदिवासी समाज को काफी उम्मीदें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर दौरे को लेकर फूलो देवी नेताम ने कहा कि क्षेत्र के आदिवासी समाज को उनसे काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने राष्ट्रपति के आगमन का स्वागत करते हुए आशा जताई कि जनजातीय समुदाय की मांगों और समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बस्तर क्षेत्र में जनजातीय समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जरूरतें लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन, रोजगार और स्थानीय स्तर पर सुविधाओं की उपलब्धता जैसे विषय क्षेत्र के विकास से जुड़े हैं।
सांसद ने उम्मीद जताई कि मुरिया दरबार में सामने आने वाली मांगों को गंभीरता से सुना जाएगा। उनके मुताबिक, इस तरह के पारंपरिक मंचों पर लोगों को अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि उनकी मांगें संबंधित स्तर तक पहुंच सकें।
राष्ट्रपति का बस्तर दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब मुरिया दरबार के नाम और आयोजन के स्वरूप को लेकर भी चर्चा हुई है। ऐसे में आम लोगों की भागीदारी और उनकी समस्याओं को सुनने की व्यवस्था इस आयोजन से जुड़े महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं।
बाढ़ प्रभावितों को जल्द राहत देने की मांग
फूलो देवी नेताम ने बस्तर में बाढ़ से हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने प्रभावित लोगों को जल्द राहत उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए और क्षेत्र की स्थिति में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।
बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद प्रभावित लोगों को राहत, पुनर्वास और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान का आकलन और जरूरत के अनुसार सहायता पहुंचाना उनकी स्थिति में सुधार के लिए जरूरी होता है।
सांसद ने इस विषय को उठाते हुए उम्मीद जताई कि बस्तर की समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा और प्रभावित लोगों को जल्द राहत मिल सकेगी।
मच्छरदानी टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी उठाए सवाल
सांसद फूलो देवी नेताम ने बस्तर में मच्छरदानी टेंडर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया होनी चाहिए और इससे जुड़ी व्यवस्थाओं को उचित तरीके से संचालित किया जाना चाहिए।
मच्छरदानी का वितरण मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में, जहां मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा रहता है, वहां बचाव के उपायों और स्वास्थ्य जागरूकता की अहम भूमिका होती है।
सांसद ने इस मुद्दे के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की जरूरत भी बताई। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं या कमियों के संबंध में विस्तृत तथ्य सामने आने पर ही उनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सकती है।
बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर
फूलो देवी नेताम ने बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होना चाहिए, ताकि क्षेत्र के लोगों को समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता स्थानीय विकास का महत्वपूर्ण पहलू है। अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं, पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मी, दवाइयां और समय पर इलाज की उपलब्धता लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं।
सांसद ने मच्छरदानी टेंडर और स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दे उठाकर क्षेत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
मुरिया दरबार की ऐतिहासिक परंपरा और वर्तमान सवाल
बस्तर दशहरा देश के विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। इसकी परंपराएं मां दंतेश्वरी की आराधना और जनजातीय समाज की सामुदायिक भागीदारी से जुड़ी हुई हैं। मुरिया दरबार इसी उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां परंपरागत प्रतिनिधियों की भूमिका विशेष मानी जाती है।
ऐतिहासिक रूप से इस दरबार में गांवों के मांझी-चालकी स्थानीय समस्याएं और मांगें सामने रखते थे। इसी वजह से इसे केवल धार्मिक आयोजन के बजाय सामाजिक संवाद की परंपरा के रूप में भी देखा जाता है।
फूलो देवी नेताम ने इसी संदर्भ में आम लोगों की भागीदारी और उनकी समस्याओं को सुने जाने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि दरबार में सभी लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर दौरे के बीच राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम ने मुरिया दरबार में आम लोगों की भागीदारी, आदिवासी समाज की मांगों, बाढ़ प्रभावितों को राहत, मच्छरदानी टेंडर और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति जनजातीय समुदाय की समस्याओं और मांगों पर ध्यान देंगी तथा उनके समाधान की दिशा में पहल होगी।
