दुर्ग। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में तिमाही परीक्षा के कमजोर परिणाम को लेकर शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ गई है। विद्यार्थियों के प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए अब स्कूलों के प्राचार्यों से जवाब-तलब किया जा रहा है। इसी कड़ी में दुर्ग ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में तिमाही परीक्षा के परिणामों की समीक्षा की गई। बुधवार को जेआरडी स्कूल में आयोजित समीक्षा बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) जगजीत सिंह ने कमजोर परिणाम वाले स्कूलों के प्राचार्यों से उनके प्रदर्शन को लेकर सवाल किए। बैठक में सामने आया कि दुर्ग ब्लॉक में कक्षा 12वीं का औसत परीक्षा परिणाम 63 प्रतिशत और कक्षा 10वीं का औसत परिणाम 58 प्रतिशत रहा है।

समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि दुर्ग ब्लॉक के 20 स्कूलों में कक्षा 10वीं का परिणाम 60 प्रतिशत से कम रहा, जबकि कक्षा 12वीं में 28 स्कूल ऐसे हैं, जिनका परीक्षा परिणाम इस स्तर तक नहीं पहुंच पाया। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिहाज से इन आंकड़ों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब शिक्षा विभाग का जोर कमजोर विद्यार्थियों की पहचान करने, उनकी लिखने की क्षमता बढ़ाने और परीक्षा की तैयारी को बेहतर बनाने पर है।
10वीं का औसत परिणाम 58%, 12वीं में 63 प्रतिशत विद्यार्थी सफल
दुर्ग ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में आयोजित तिमाही परीक्षा के परिणामों की समीक्षा के दौरान कक्षा 10वीं और 12वीं के प्रदर्शन पर विशेष चर्चा हुई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कक्षा 10वीं का औसत परिणाम 58 प्रतिशत रहा, जबकि कक्षा 12वीं का औसत परिणाम 63 प्रतिशत दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों के आधार पर शिक्षा विभाग ने कमजोर परिणाम वाले स्कूलों के प्राचार्यों से जवाब मांगा। विभाग यह समझने का प्रयास कर रहा है कि विद्यार्थियों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप क्यों नहीं रहा और किन कारणों से परीक्षा परिणाम प्रभावित हुआ।
कक्षा 10वीं में 20 स्कूलों तथा कक्षा 12वीं में 28 स्कूलों का परिणाम 60 प्रतिशत से कम होना भी समीक्षा का प्रमुख विषय रहा। बोर्ड परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति में सुधार लाने के लिए स्कूल स्तर पर विशेष प्रयास करने की जरूरत बताई गई।
उपस्थिति कम होने और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पर उठे सवाल
समीक्षा बैठक के दौरान कमजोर परिणाम वाले स्कूलों के प्राचार्यों ने अपने-अपने स्तर पर कारण बताए। कुछ प्राचार्यों का कहना था कि विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति नहीं होने के कारण परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं रहा। उनका मानना था कि कक्षाओं में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है, जिसका असर परीक्षा में उनके प्रदर्शन पर पड़ता है।
वहीं, कुछ प्राचार्यों ने उत्तर पुस्तिकाओं की कड़ाई से जांच किए जाने को भी कमजोर परिणाम का एक कारण बताया। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सामान्य और निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच में किसी प्रकार का पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए।
बैठक में यह संदेश दिया गया कि परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया को दोष देने के बजाय पढ़ाई की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपस्थिति और उनकी तैयारी पर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा।
फरवरी में होंगी बोर्ड परीक्षाएं, अब पूरे सिलेबस से होगी अर्धवार्षिक परीक्षा
इस बार कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी महीने में आयोजित होने की बात को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में पढ़ाई की रणनीति पर भी चर्चा की गई। तिमाही परीक्षा के बाद विद्यार्थियों की अर्धवार्षिक परीक्षा पूरे पाठ्यक्रम के आधार पर लेने की योजना है।
ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने निर्धारित समय में पूरे सिलेबस की तैयारी पूरी करने की चुनौती रहेगी। कमजोर परिणाम को देखते हुए स्कूलों को पढ़ाई की गति बढ़ाने, पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने और विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए व्यवस्थित तरीके से तैयार करने पर ध्यान देना होगा।
अर्धवार्षिक परीक्षा को भी विद्यार्थियों की तैयारी परखने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इसके परिणाम से यह समझने में मदद मिल सकती है कि तिमाही परीक्षा के बाद विद्यार्थियों के प्रदर्शन में कितना सुधार हुआ है और किन विषयों में उन्हें अतिरिक्त सहायता की जरूरत है।
पढ़ाई के अलावा दूसरी गतिविधियों में समय खर्च होने की भी चर्चा
समीक्षा के दौरान स्कूलों में शैक्षणिक कार्यों के अतिरिक्त संचालित होने वाली विभिन्न गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठे। दबे स्वर में यह बात सामने आई कि कुछ स्कूलों में ऐसी गतिविधियां आयोजित होती हैं, जिनका पढ़ाई से सीधा संबंध नहीं होता। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों का समय प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
हालांकि, इन गतिविधियों के नाम और उनके कारण पढ़ाई पर पड़ने वाले प्रभाव का कोई विस्तृत आंकड़ा सामने नहीं आया है। फिर भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि बोर्ड परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों को पर्याप्त समय तक नियमित कक्षाएं, पाठ्यक्रम का दोहराव और लिखित अभ्यास उपलब्ध कराना जरूरी होता है।
स्कूलों में अन्य गतिविधियों और शैक्षणिक कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और निर्धारित समय में पाठ्यक्रम पूरा किया जा सके।
कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर लिखने का अभ्यास कराने के निर्देश
जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह ने कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की पहचान करने और उनके लिए विशेष तैयारी कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्यार्थियों को सीमित पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण हिस्सों पर ध्यान केंद्रित कर अधिक से अधिक लिखने का अभ्यास कराया जाए।
परीक्षाओं में केवल विषय को समझना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि निर्धारित समय में प्रश्नों के उत्तर सही तरीके से लिखना भी जरूरी है। नियमित लिखित अभ्यास से विद्यार्थियों को उत्तरों की संरचना, समय प्रबंधन और प्रश्नों के अनुरूप उत्तर तैयार करने में मदद मिल सकती है।
कमजोर विद्यार्थियों के लिए स्कूल स्तर पर अतिरिक्त अभ्यास और नियमित मूल्यांकन की व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है। इससे शिक्षकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि विद्यार्थी किन विषयों या अध्यायों में पीछे हैं और उन्हें किस तरह की सहायता की आवश्यकता है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल की वेबसाइट पर उपलब्ध स्टडी मैटेरियल से तैयारी पर जोर
समीक्षा बैठक में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की वेबसाइट पर उपलब्ध स्टडी मैटेरियल का उपयोग करने पर भी जोर दिया गया। विद्यार्थियों को इस अध्ययन सामग्री के आधार पर तैयारी कराने और महत्वपूर्ण विषयों का नियमित अभ्यास कराने के निर्देश दिए गए।
बोर्ड की ओर से उपलब्ध अध्ययन सामग्री विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयारी करने में मदद कर सकती है। शिक्षक इसका उपयोग कक्षा में अभ्यास, प्रश्नों के समाधान और परीक्षा की तैयारी के लिए कर सकते हैं।
शिक्षा विभाग की कोशिश है कि तिमाही परीक्षा में कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी आगामी परीक्षाओं से पहले अपनी कमियों को दूर कर सकें। इसके लिए स्कूलों में पढ़ाई की नियमित समीक्षा और विद्यार्थियों की प्रगति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
समीक्षा बैठक में अधिकारी और प्राचार्य रहे मौजूद
जेआरडी स्कूल में आयोजित इस समीक्षा बैठक में सहायक संचालक अमित घोष सहित दुर्ग ब्लॉक के विभिन्न स्कूलों के प्राचार्य उपस्थित रहे। बैठक में परीक्षा परिणामों की स्थिति, कमजोर प्रदर्शन के कारणों और विद्यार्थियों की तैयारी में सुधार के उपायों पर चर्चा की गई।
अब आगामी परीक्षाओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन पर नजर रहेगी। दुर्ग ब्लॉक के स्कूलों में तिमाही परीक्षा के परिणामों के बाद शिक्षा विभाग ने सुधार के लिए प्रयास तेज करने का संकेत दिया है। कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त अभ्यास कराने, पूरे पाठ्यक्रम की तैयारी समय पर पूरी करने और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, दुर्ग ब्लॉक में 10वीं का 58 प्रतिशत और 12वीं का 63 प्रतिशत औसत तिमाही परीक्षा परिणाम शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। फरवरी में प्रस्तावित बोर्ड परीक्षाओं से पहले अब स्कूलों को विद्यार्थियों की उपस्थिति, नियमित पढ़ाई और लिखित अभ्यास पर विशेष ध्यान देना होगा।
