रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग ने प्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी है। शिक्षा विभाग की प्रेस वार्ता में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और विभागीय सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने शिक्षकों की भर्ती, युक्तियुक्तकरण, पदोन्नति, स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति और नए शैक्षणिक सत्र से जुड़े बदलावों की जानकारी साझा की।

विभाग का कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को अभियान के रूप में पूरा किया गया है। इसके जरिए 453 विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने का दावा किया गया है। साथ ही आने वाले समय में प्रदेश में 5,000 शिक्षकों की भर्ती चरणबद्ध तरीके से करने की तैयारी है।
453 स्कूलों में शिक्षकों की कमी हुई दूर
शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश के अलग-अलग स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करने के लिए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी की गई है।
इस प्रक्रिया के तहत जिन स्कूलों में जरूरत से अधिक शिक्षक उपलब्ध थे, वहां उपलब्ध मानव संसाधन का दूसरे जरूरतमंद स्कूलों में बेहतर इस्तेमाल किया गया। विभाग का दावा है कि इससे 453 विभिन्न विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिली है।
अधिकारियों के मुताबिक इसका उद्देश्य स्कूलों को बंद करना या उनकी संख्या कम करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर तरीके से समायोजन और उपयोग करना है।
स्कूलों के एकीकरण पर विभाग की सफाई
प्रेस वार्ता में स्कूलों के एकीकरण को लेकर भी विभाग ने स्थिति स्पष्ट की। विभाग का कहना है कि स्कूलों के एकीकरण की प्रक्रिया का उद्देश्य स्कूलों की संख्या घटाना नहीं है।
बल्कि जहां आसपास के स्कूलों में संसाधनों का दोहराव था, वहां उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की कोशिश की गई है। इससे शिक्षकों, भवनों और अन्य शैक्षणिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
चरणबद्ध तरीके से होगी 5 हजार शिक्षकों की भर्ती
स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने 5,000 शिक्षकों की भर्ती करने की जानकारी दी है।
मंत्री गजेंद्र यादव के अनुसार भर्ती एक साथ करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। इससे अलग-अलग विषयों और स्कूलों में जरूरत के अनुसार रिक्त पदों को भरने में मदद मिलेगी।
विभाग का कहना है कि नियमित पदों पर भर्ती के लिए निर्धारित भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जबकि संविदा पदों के लिए अलग प्रक्रिया रखी गई है।
नियमित और संविदा भर्ती की प्रक्रिया अलग
शिक्षा विभाग के अनुसार नियमित पदों पर होने वाली भर्तियां कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से की जाएंगी।
वहीं संविदा पदों पर भर्ती के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT आयोजित की जाएगी।
इससे भर्ती प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा और उम्मीदवारों की योग्यता का मूल्यांकन एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जा सकेगा।
मेरिट के आधार पर होगी भर्ती
विभाग ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में मेरिट को आधार बनाया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। इसी वजह से संविदा पदों के लिए भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
CBT के जरिए परीक्षा आयोजित होने से प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने और परीक्षा में मानवीय हस्तक्षेप को कम करने में मदद मिल सकती है।
पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा
प्रेस वार्ता के दौरान शिक्षा मंत्री ने शिक्षक संवर्गों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर भी जानकारी दी।
मंत्री के मुताबिक शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है। विभाग का कहना है कि पदोन्नति से जुड़े मामलों में निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन किया गया है।
इसके साथ ही विभाग ने स्पेशल एजुकेटर के पदों पर भर्ती की जानकारी भी दी। इससे विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
1 अप्रैल से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र
शिक्षा विभाग ने स्कूलों के शैक्षणिक सत्र 2026-27 को लेकर भी बड़ा बदलाव बताया है।
अब प्रदेश के स्कूलों में नया शिक्षण सत्र 1 अप्रैल से शुरू करने की व्यवस्था की जाएगी।
पहले प्रदेश में सामान्य तौर पर नया शैक्षणिक सत्र 15 जून के आसपास शुरू होता था। नई व्यवस्था के तहत स्कूलों के संचालन और शैक्षणिक गतिविधियों को पहले से शुरू किया जाएगा।
पूरे प्रदेश में एक समान टाइम-टेबल की तैयारी
नए शिक्षण सत्र के साथ प्रदेश के सभी स्कूलों के लिए एक समान शैक्षणिक समय-सारिणी तैयार करने की भी योजना है।
इसका उद्देश्य स्कूलों के संचालन में एकरूपता लाना है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्कूलों के समय और शैक्षणिक गतिविधियों में अंतर के बजाय एक व्यवस्थित व्यवस्था लागू करने की कोशिश की जा रही है।
विभाग के मुताबिक इससे पूरे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।
नई व्यवस्था से क्या होगा फायदा?
शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू करने के पीछे विभाग का उद्देश्य पूरे साल की शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करना है।
इससे:
- स्कूलों का शैक्षणिक कैलेंडर पहले से तय किया जा सकेगा।
- विद्यार्थियों को पूरे सत्र के लिए पर्याप्त शिक्षण समय मिल सकेगा।
- परीक्षा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।
- पूरे प्रदेश में स्कूल संचालन में एकरूपता आएगी।
- शिक्षकों की उपलब्धता और उनकी तैनाती को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा।
शिक्षा विभाग के फैसलों का फोकस क्या है?
प्रेस वार्ता में सामने आई जानकारी से स्पष्ट है कि शिक्षा विभाग फिलहाल तीन प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस कर रहा है।
पहला—शिक्षकों की कमी दूर करना।
इसके लिए युक्तियुक्तकरण के साथ 5 हजार शिक्षकों की चरणबद्ध भर्ती की जा रही है।
दूसरा—भर्ती और पदोन्नति में पारदर्शिता।
नियमित भर्ती कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से और संविदा भर्ती में CBT का इस्तेमाल किया जाएगा।
तीसरा—स्कूलों के संचालन में एकरूपता।
1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और पूरे प्रदेश के लिए समान शैक्षणिक समय-सारिणी तैयार करने की योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग की प्रेस वार्ता में स्कूल शिक्षा को लेकर कई बड़े बदलावों की तस्वीर सामने आई है। 453 स्कूलों में युक्तियुक्तकरण के जरिए शिक्षकों की कमी दूर करने के बाद अब 5 हजार शिक्षकों की चरणबद्ध भर्ती की तैयारी है। इसके साथ ही संविदा भर्ती में CBT और मेरिट आधारित चयन पर जोर दिया जा रहा है।
वहीं 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू करने का फैसला स्कूल शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। आने वाले समय में इन फैसलों का वास्तविक असर स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों के शिक्षण समय और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर दिखाई देगा।
